पुस्तक के बारे में
‘ग्रामीण विकास का भूगोल’ पुस्तक की रचना अखिल भारतीय स्तर पर ग्रामीण विकास से जुड़े संगठन, निकाय, शोधकेन्द्र व विभिन्न विश्वविद्यालयों के पाठ्यक्रमों को मद्देनजर रखकर की गई है। इसमें ग्रामीण विकास की अवधारणा के सूत्रपात की स्पष्ट व्याख्या करते हुए इसके भूगोल विषय में स्वतंत्र शाखा के रूप में स्थापित होने तक की रूपरेखा सम्मिलित है। ग्रामीण विकास, भूमि उपयोग की अवधारणा, ग्रामीण अधिवास, अवसंरचना सुधार के तत्वों, ग्रामीण नियोजन एवं भूमि प्रबन्धन, पशुधन प्रबन्धन, जल प्रबन्धन, राजस्थान में ग्रामीण विकास, जलग्रहण प्रबन्धन एवं ग्रामीण विकास, बंजर भूमि विकास एवं विकसित भारत-रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) आदि मूल विषयों को सम्मिलित किया गया है। ये सभी विषय देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों द्वारा नई शिक्षा नीति-2020 के अन्तर्गत निर्धारित पाठ्यक्रमों के अनुसार हैं। अतः यह पुस्तक राष्ट्रीय एवं राज्य स्तर के सभी शोध एवं प्रबन्धन संस्थानों के साथ ही विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों में अध्ययनरत् विद्यार्थियों के लिए भी उपयोगी है।
| Weight | 0.400 Gm. |
|---|---|
| Year | 2026 |
| Pages | 196 |
| Edition | Paper Back |
| Author | Dr. B.C. Jat, Prof. Jai Bharat Singh & Ranveer Yadav |
| About the Authors | Dr. B.C. Jat, Prof. Jai Bharat Singh & Ranveer Yadav |
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